नमस्कार किसान भाइयों खेती-किसानी से जुड़े परिवारों के लिए यह योजना एक बड़ा वित्तीय कवच है। अगर परिवार के कमाऊ सदस्य की खेती या किसी अन्य दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता हो जाती है, तो उत्तर प्रदेश सरकार अधिकतम ₹5 लाख की आर्थिक सहायता देती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT के जरिए भेजी जाती है। 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए ₹1,150 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल से ₹100 करोड़ अधिक है ।
मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना एवं राहत सहायता योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना कल्याण योजना 14 सितंबर 2019 से लागू है । इसका मकसद साफ है—जब किसी किसान परिवार का कमाऊ सदस्य दुर्घटना का शिकार हो जाए, तो परिवार को आर्थिक संकट से बचाया जा सके। शुरुआत में यह योजना केवल भूमिधारक किसानों तक सीमित थी, लेकिन अब इसमें बटाईदार, पट्टेदार और भूमिहीन कृषि श्रमिक भी शामिल किए गए हैं ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फरवरी 2026 में 3,500 लाभार्थी परिवारों को ₹175 करोड़ की सहायता राशि वितरित की थी । राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21,659 परिवारों को इस योजना का लाभ मिला, जबकि 2026-27 में अब तक 17,152 से अधिक परिवारों को सहायता दी जा चुकी है ।
पात्रता कौन कर सकता है आवेदन
इस योजना का दायरा काफी व्यापक है। पात्रता की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:
- खतौनी में दर्ज खातेदार या सहखातेदार: जिनके नाम पर कृषि भूमि दर्ज है।
- कमाऊ पारिवारिक सदस्य: जिनकी आजीविका का मुख्य स्रोत खातेदार के नाम दर्ज भूमि से होने वाली कृषि आय है ।
- बटाईदार और पट्टेदार: बटाई या पट्टे की भूमि पर खेती करने वाले पात्र किसान भी इसके दायरे में आते हैं ।
- भूमिहीन कृषि श्रमिक: निर्धारित शर्तों के तहत ये भी योजना का लाभ ले सकते हैं ।
यहां यह स्पष्ट कर दें कि यह राशि दुर्घटना के कारण मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में ही दी जाती है। सामान्य बीमारी या अन्य कारणों से हुई मृत्यु पर यह योजना लागू नहीं होती।
आवेदन की प्रक्रिया क्या दस्तावेज लगते हैं
आवेदन की प्रक्रिया ज्यादातर मामलों में लेखपाल के माध्यम से पूरी होती है। अगर आपको या आपके परिवार को इस योजना का लाभ लेना है, तो निम्न दस्तावेज तैयार रखें:
- आधार कार्ड (मृतक किसान का और आवेदक का)
- खतौनी (भूमि रिकॉर्ड)
- मृत्यु प्रमाण पत्र या मेडिकल रिपोर्ट (दिव्यांगता की स्थिति में)
- बैंक पासबूक (लाभार्थी के नाम से)
- पासपोर्ट साइज फोटो
- शपथ पत्र (परिवार के सदस्यों द्वारा)
इटावा के जसवंतनगर क्षेत्र के मामले में देखा गया है कि लेखपाल ने परिवार की मदद की, दस्तावेज जमा किए और ऑनलाइन आवेदन किया। अधिकारियों ने घर आकर सत्यापन किया और करीब चार महीने के भीतर ₹5 लाख की राशि बैंक खाते में पहुंच गई ।
असली जिंदगी की कहानी इटावा के दो परिवारों का अनुभव
इटावा जिले के नगला बंशी गांव के प्रेम सिंह की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। वह करीब 53 साल के थे और भैंसों के लिए चारा लेने जा रहे थे, तभी पीछे से आई बाइक ने टक्कर मार दी। परिवार को स्थानीय लोगों से योजना की जानकारी मिली। लेखपाल ने आवेदन में मदद की और करीब चार महीने बाद प्रेम सिंह की पत्नी फूल देवी के खाते में ₹5 लाख आ गए। परिवार का कहना है कि इस राशि से बेटियों की शादी में मदद मिलेगी ।
दूसरे मामले में नागरी गांव के रामनारायण शर्मा की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई। उनके तीन बेटों ने शपथ पत्र के साथ आवेदन किया और करीब छह महीने में ₹5 लाख की राशि खाते में आ गई ।
इटावा जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 508 किसान परिवारों को ₹21.10 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई ।
एक महत्वपूर्ण अपडेट 24 घंटे में राशि पहुंचाने का लक्ष्य
मई 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मऊ में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि दुर्घटना की स्थिति में 24 घंटे के भीतर परिवार तक सहायता राशि पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है । हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी भी आवेदन से भुगतान तक चार से छह महीने का समय लग रहा है। सरकार ने योजना के लिए एक पोर्टल विकसित किया है, जिसे सीएम डैशबोर्ड से इंटीग्रेट किया गया है ताकि प्रगति की निगरानी की जा सके ।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना एवं राहत सहायता योजना उत्तर प्रदेश के किसान परिवारों के लिए एक भरोसेमंद वित्तीय सुरक्षा कवच है। ₹5 लाख तक की सहायता, बटाईदारों और भूमिहीन किसानों तक विस्तारित दायरा, और बढ़ता बजट—ये सब मिलकर इस योजना को और मजबूत बनाते हैं। अगर आपके परिवार या आसपास किसी किसान परिवार के साथ ऐसी दुर्घटना हुई है, तो तुरंत अपने लेखपाल या तहसील कार्यालय से संपर्क करें। दस्तावेज पूरे होने पर राशि सीधे बैंक खाते में आ जाती है। यह योजना साबित करती है कि संकट की घड़ी में सरकार किसान परिवारों के साथ खड़ी है।